मध्यप्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पाटी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक मात्र चेहरे पर ही जीता और मप्र में भाजपा
की बहुमत से सरकार बनाई तथा केन्द्र में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मप्र की साझेदारी 29 में से 29 संसद सदस्यों की इसलिए रही क्योंकि
प्रधानमंत्री ने दोनों चुनावों के दरमियान मप्र की जनता से केवल एक ही वायदा किया था जो ब्रह्मास्त्र बना, वह यह कि उनकी सरकार मप्र और केन्द्र दोनों में
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का फार्मूला पूरी ईमानदारी के साथ लागू करेंगे। केन्द्र में तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जरा सी शिकायत मिलने पर मंत्रिमंडल से
मंत्री बाहर कर दिए जाते हैं, नौकरशाही में किसी की हिम्मत नहीं कि वह मोदी के रहते भ्रष्टाचार करे और करेगा तो उसे पता है कि हश्र क्या होने वाला है। परन्तु
मप्र एक ऐसा राज्य है जहां पर नौकरशाही 5 कैटेगरी में बंटी हुई और इसी आपसी गुटबाजी के चक्कर में ईमानदार कैटैगरी के नौकरशाहों को भ्रष्ट नौकरशाहों की चक्की
का पिसा हुआ आटा खाना पड़ता है। और तो और जिन भ्रष्ट नौकरशाहों को बिना घूसखोरी के काम करने की आदत नहीं है, वे जनता का खून पीने तक भ्रष्टाचार करते हैं। यह
लिखने में एक प्रतिशत भी संकोच नहीं है कि, खाते हैं ये नौकरशाह और बदनाम होते हैं सत्तारुढ़ दल के सभी नेता। मुख्यमंत्री और मंत्री का तो नाम लेना इन्हीं
नौकरशाहों के चक्कर में विपक्ष द्वारा आसान हो जाता है, लेकिन जब विधानसभा सामने हो तब सदन में मंत्रियों को ही अपने विभाग का बचाव करना होता है, उसी के चलते ये
2-4 भाई लोग बच जाते हैं। बता दें कि मप्र में नौकरशाही की पहली एवं निहायत ईमानदार कैटेगरी है, जिसमें मात्र एक दर्जन नौकरशा हैं, जो काम नहीं करती है बल्कि काम
की लंबाई नापती है, और उसकी टाल मटोली वाली समय-सीमा कैसे बढ़ाई जा सकती है वह सिर्फ इसी पर काम करती है। लेकिन निहायत ईमानदार नौकरशाहों की दूसरी कैटेगरी भी
है जो काम भी करती है और सरकार का चेहरा बनकर हर समय अपने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की नीतियों के क्रियान्वयन में सबसे आगे रहती है और इस कैटेगरी में
मुख्य सचिव स्तर से लेकर कलेक्टर स्तर तक के 100 से अधिक नौकरशाहों को ख्याति अर्जित है। जहां तक सवाल है तीसरी कैटेगरी का उसे थोड़ी सी बेईमानी का दर्जा
प्राप्त है, लेकिन इस कैटेगरी का काम जबर्दस्त है, और इस कैटेगरी में ऊपर से लेकर नीचे तक इनकी उपस्थिति अच्छी है और ये नौकरशाह काम के बाद श्रद्धा से कोई दे जाए
तो उसका भला और कोई न तो उसका भी भला, लेकिन काम नहीं रुकेगा। ठीक इसी तरह चौथी कैटेगरी वह लोकप्रिय है और तथाकथित ईमानदार है लेकिन है ‘डेम-करप्ट’ मतलब इनका बस
चले तो यह अपने पिताजी का भी काम फ्री में नहीं करेंगे। और जब इनकी शिकायत किसी नेता या फिर किसी वकील या फिर किसी मीडियाकर्मी ने कर दी और वह शिकायत सही पाई गई
तो फिर उसके खिलाफ स्ट्रक्चर पास कराने की धमकी देने में भी यह कैटेगरी पीछे नहीं रहती। चौंकाने वाली तो यह है कि, इस चौथी कैटेगरी में मप्र कॉडर के नौकरशाह
हैं ही नहीं। 4-5 लोगों की चौकड़ी है और अन्य राज्यों से हैं, और यह कैटेगरी ऐसी है जिसके बारे में कहा जाता है कि, ‘इन चारों को सारे नजर आते हैं चोर’। अब आइए आप
रोचक 5वीं कैटेगरी के बारे में शिद्दत से जानकारी प्राप्त करिए। लगभग ढाई-तीन दर्जन नौकरशाह इस 5वीं कैटेगरी में हैं जिनका काम केवल डाकिया का है, परन्तु डाक
लिखने और भेजते समय जो जानकारी उन्हें सटीक लगती है वे उसे विसल व्लोअर की तरह बाजार में उपलब्ध करा देते हैं, फिर मचता है हड़कंप और ये जब छुट्टी मनाने जाते
हैं तो खूब ताली बजाते हैं। इस विशेष संपादकीय का लब्बोलुआब यह है कि, मप्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रधानमंत्री मोदी के काम से जनता खुश है और 20 साल बाद
बेरोजगारों को रोजगार के अवसर, 5 लाख करोड़ से अधिक के पूंजीनिवेश की संभावनाओं ने मप्र के युवाओं में नए उत्साह का संचार किया है इसमें संदेह नहीं है, लेकिन
मुख्य सचिव के सामने 5 कैटेगरी में बंटे हुए नौकरशाहों में से कुछ अकर्मण्य एवं भ्रष्टतम नौकरशाह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लागू किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ
जीरो टॉलरेंस के फार्मूले को सफल बनाने में बड़े तकलीफ दायक हैं, बेहिसाब खाते हैं लेकिन बदनाम होते हैं सत्तारूढ़ दल के नेता और मंत्री, ऐसा माना जाए तो
चौंकिएगा मत।