टीबी के एमडीआर मरीजों को अब बीपीएएलएम पद्धति से इलाज
29/05/2025 1:53 PM Total Views: 25722

Amar Shankar Bharti
मध्यप्रदेश में अब मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर- टीबी) के मरीजों को पहले से अधिक असरदार और कम समय में राहत देने के लिए नई चिकित्सा पद्धति बीपीएएलएम लागू की जा रही है। इसकी शुरुआत बुधवार से राजधानी भोपाल से हो चुकी है। आने वाले दिनों में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। एमडीआर-टीबी वह अवस्था होती है, जब टीबी के मरीज पर पारंपरिक दवाएं असर नहीं करतीं। अब तक इस स्थिति में इलाज लंबा और बेहद कठिन होता था। मरीजों को करीब 20 महीने तक लगातार दवाएं लेनी पड़ती थीं। लेकिन बीपीएएलएम रेजीम से अब यह इलाज 6 से 9 महीनों में पूरा हो सकता है। इस पद्धति में चार अत्याधुनिक दवाओं-बेडाक्विलाइन, प्रिटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन- का संयोजन है, जो टीबी के उन वायरस पर असर करती हैं, जो अब तक की दवाओं से नियंत्रित नहीं हो पाते थे। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने जानकारी दी कि बीपीएएलएम पद्धति को 28 मई से भोपाल जिले में लागू कर दिया गया है। चिकित्सा शोधों में यह सिद्ध हो चुका है कि यह पद्धति पारंपरिक इलाज के मुकाबले ज्यादा प्रभावी है, जिससे मरीजों को न सिर्फ जल्दी राहत मिलती है बल्कि उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होता है। डॉ. तिवारी के अनुसार, इन दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जा सकता है। हर मरीज की चिकित्सकीय स्थिति की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि कौन- सी दवा किस मात्रा में दी जानी है। एमडीआर-टीबी एक जटिल और खतरनाक संक्रमण है, लेकिन बीपीएएलएम रेजीम से इसके इलाज की दिशा में उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है।
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नायक पथ
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