मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में ई-वैल्यूएशन सॉफ्टवेयर की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि कई छात्रों को सही उत्तर देने के बावजूद शून्य अंक दिए गए, जबकि गलत उत्तरों पर नंबर मिल गए। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने खुद सॉफ्टवेयर का डेमो देखा और पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह अस्पष्ट है। यह स्पष्ट

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नहीं हो पा रहा था कि किस आधार पर अंक दिए गए। सुनवाई के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई—एक ही छात्र की कॉपी जब अलग-अलग बार जांची गई, तो हर बार अलग अंक मिले। कहीं 5-6 नंबर मिले तो दूसरी बार वही घटकर 2-3 रह गए। इससे साफ संकेत मिला कि न सिर्फ सॉफ्टवेयर, बल्कि पूरी मूल्यांकन प्रणाली में खामियां हैं। कोर्ट ने इसे छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सख्त निर्देश दिए हैं। अब डिजिटल पेन के जरिए स्पष्ट मार्किंग अनिवार्य की जाएगी, ताकि हर अंक का आधार ट्रैक किया जा सके। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से अगली सुनवाई में विस्तृत और संतोषजनक जवाब मांगा है। यह मामला अब प्रदेशभर के छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।