मध्यप्रदेश में पहली बार रिटायर होने वाले आउट गोइंग मुख्य सचिव का चेहरा सबसे ज्यादा विवादित हो गया है। विवादित इसलिए नहीं कि वे भ्रष्ट या फिर काम नहीं
करने वाले निकम्मे नौकरशाह हैं, विवादित इसलिए क्योंकि उन्होंने अपनी कार्यशैली में काम कम प्रधानमंत्री कार्यालय के दूत के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. यादव
को लगातार दबाव में रखकर उन्हें कंफरटेबल रखकर काम नही करने दिया। यही कारण है कि, अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन की सेवावृद्धि को लेकर शून्य
की मुद्रा में हैं, न हां कहते हैं और न ही उन्होंने न कहा है। भारतीय जनता पार्टी की मप्र में लगातार 2003 के बाद सरकार में जब भी मुख्य सचिव के रिटायर होने के बाद
नए मुख्य सचिव की नियुक्ति का मौका आया तो उनके रिटायर होने के महीने भर पहले ही बनने वाले मुख्य सचिव के पास परंपरागत फाइलें विश्लेषण के बाद मुख्यमंत्री के
अनुमोदनों के लिए भेजी जाती रही हैं, और फिर वही नौकरशाह वरीयता के आधार पर मुख्य सचिव बना दिया जाता है। परन्तु कुछ वर्षों से जब से मोदी युग ने राज्यों का
नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है तब से भाजपा शासित राज्यों में रिटायर होने के बाद मुख्य सचिव को सेवावृद्धि देने अथवा नए मुख्य सचिव की नियुक्ति का
निर्णय पीएमओ के नियंत्रण में आ गया है। लेकिन 1989 बैच के अनुराग जैन को सेवावृद्धि मिले इस मामले में सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असहमति का कड़ा
रुख अपना लिया है। प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्र बताते हैं कि, पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मुख्य सचिव अनुराग जैन की वजह से तनाव में देखते हुए
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हस्तक्षेप कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संघ की ओर से सुझाव दिया गया है कि, अनुराग जैन भले ही
ईमानदार नौकरशाह हैं, लेकिन उन्होंने कुछ भ्रष्टाचार में लिप्त नौकरशाहों का खुला समर्थन करके प्रधानमंत्री के विजन और मुख्यमंत्री के मिशन में रुकावट
डालने की नाकाम कोशिशें की है इसलिए यदि जरूरी न हो तो अनुराग जैन को सेवावृद्धि न दी जाए। सूत्रों के अनुसार संघ के शिखर के नेताओं ने जिन्हें मप्र की चिंता
है उन्होंने कहा है कि, यदि पीएमओ अनुराग जैन की सेवावृद्धि के लिए पूर्व से ही वचनवद्ध हो तो फिर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन की तरह इन्हें भी मात्र 3
महीने की सेवावृद्धि देनी चाहिए और इसकी भी सहमति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेनी चाहिए। संघ के हस्तक्षेप के बाद बताया जाता है कि, प्रधानमंत्री मोदी और
गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कह दिया है कि, वे बेफ्रिक रहे अब जो भी मुख्य सचिव होगा चाहे अनुराग जैन ही क्यों न हो, उसे प्रधानमंत्री के विजन
और मुख्यमत्री के मिशन के साथ चलना ही पड़ेगा, नहीं तो मुख्यमंत्री चाहें तो किसी भी समय टाटा- बाय-बाय कर सकते हैं या उन्हें रिटायर होने के पहले किसी आयोग का
अध्यक्ष बनाकर दबाव मुक्त हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। ऐसी विषम परिस्थिति में सवाल उठता है कि मप्र का नया मुख्य सचिव फिर से अनुराग जैन ही होगा या फिर किसी
और की लाटरी खुलेगी। खबर लिखने तक इस बात की जानकारी राष्ट्रीय हिन्दी मेल को नहीं मिली है कि, वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन को पीएमओ सेवावृद्धि देने के लिए
सहमत है अथवा नहीं। लेकिन इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि, प्रधानमंत्री सचिवालय मप्र में भाजपा के मुख्यमंत्री को किसी भी सूरत में अस्थिर भाव से
काम करने की स्थिति किसी नौकरशाह के कारण बर्दाश्त नहीं करने वाला है। मतलब स्पष्ट है कि, अनुराग आएंगे तो जाएंगे भी जल्दी, इसलिए इस स्थिति का आभास उन्हें
नहीं हुआ है, ऐसा भी नहीं है, मतलब संभवत: वे स्वयं नहीं चाहते कि उन्हेेें सेवावृद्धि मिले, लेकिन रिटायर होने के बाद पुनर्वास के लिए उनकी तैयारी जोरों पर है।
अर्थात अब यह अपेक्षा करना गलत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री जिसे चाहेंगे वहीं मप्र का नया मुख्य सचिव होगा और ऐसी स्थिति में फिर पीएमओ की पसंद सबसे पहले मनोज
गोविल और उसके बाद मुख्यमंत्री की पसंद डॉ. राजेश राजौरा में से कोई एक मुख्य सचिव बन जाए तो चौंकिएगा मत, चौंकिएगा तब जब अनुराग जैन को 3 महीने का एक्सटेंशन
लेने से साफ-साफ मना कर जाएं और कहें मुझे साल चाहिए…