FacebookTwitterEmailWhatsAppLinkedInShare नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट: विजय कुमार दास (मो. 9617565371) मध्यप्रदेश में सिया एक ऐसा संगठन है जिसकी संवैधानिकता सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तय की जाती है क्योंकि भारत सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नियमों को पालन करने में या उनके विधिक प्रावधानों का उल्लंघन करने के साथ गंभीर अनियमितताएं एवं कदाचरण किया जाए तो फिर सर्वोच्च न्यायालय के

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आदेश सर्वोपरि माना जाता है। इसी अवधारणा के चलते भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 7 जनवरी 2025 के द्वारा मप्र में SEIAA का गठन किया गया है। सिया मतलब राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण में 28 मार्च 2025 से लेकर 21 अप्रैल 2025 तक एक भी बैठक आयोजित नहीं करने की वजह से 700 प्रकरणों में सिया के द्वारा अनुमतियां जारी नहीं की जा सकी है और इसकी जवाबदारी SEIAA के सचिव उमा माहेश्वरी के अधिकार क्षेत्र में है। सूत्रों के अनुसार सिया के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान के द्वारा मुख्य सचिव अनुराग जैन को यह सूचित किया गया था कि मप्र में SEIAA पंगु हो गया है। अध्यक्ष और सदस्य के अनुरोध के बावजूद भी सचिव उमा माहेश्वरी के समझ में यह बात नहीं आई कि, भारत सरकार की अधिसूचना की कंडिका 11 के उल्लंघन से मप्र सरकार को राजस्व का कितना घाटा हो रहा है और तो और मनमाने ढंग से गंभीर अनियमितताओं के साथ सचिव के रूप में काम करना पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन भारत सरकार के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसी अवधारणा के चलते जब SEIAA के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान द्वारा SEIAA को सक्रियता से काम करने के लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन से सचिव व माहेश्वरी की शिकायत की गई तो अनुराग जैन ने SEIAA के अध्यक्ष की बिल्कुल नहीं सुनी। अनुराग जैन के इसी रवैये से निराश होकर अंतत: बताते हैं कि शिवनारायण सिंह चौहान ने भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव का उमा माहेश्वरी के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा बनाकर भेज दिया है और अनुरोध किया है कि, मप्र में PRIOR EC के प्रकरणों के निराकरणों में गुणवत्ता संधारित करने के लिए SEIAA के अध्यक्ष ने भारत सरकार से स्पष्ट अनुरोध किया है कि, SEIAA के सचिवालय को सक्षम एवं प्रभावी बनाने जाने के लिए पूर्णकालिक एक ईमानदार सचिव की आवश्यकता है। पत्र में लिखा गया है कि, वर्तमान सचिव उमा माहेश्वरी के पास दूसरी अन्य जिम्मेदारियां दी गई हैं इसके लिए SEIAA को उन्होंने चारागाह बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक SEIAA के अध्यक्ष ने SEIAA को मप्र के विकास को प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप बनाने के लिए खनिज संसाधनों के दोहन का समयबद्ध सिया के उपयोग का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि, वेलफर्निस्ड तथा वेलइक्युव्ड कार्यालय से ही SEIAA शासकीय कार्यों को समय पर पूरा कर सकता है। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि, मप्र के इतिहास में पहली बार SEIAA के किसी अध्यक्ष ने SEIAA के पंगु होने की वजह से राज्य सरकार को अरबों का खनिज राजस्व के घाटे की चिंता की गई है और पूंजीनिवेशकों को जिस तरह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मप्र में आकर्षित कर रहे हैं उनके हिसाब से तो SEIAA के सचिव ने 360 डिग्री में SEIAA को ठप्प कर दिया है और जिन खनिज उद्यमियों द्वारा करोड़ों-अरबों के बैंकों से ऋण लिए गए है वे हताशा के दौर से गुजर रहे हैं। और इसके आगे SEIAA का चौपट कारोबार यदि देखना हो तो आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि मप्र में रेत खदानों की नीलामी हुए 3-4 महीने हो गए लेकिन खदानों में पर्यावरण की मंजूरी नहीं मिलने के कारण रेत के ठेकेदार सरकार की रायल्टी नहीं पटा रहे हैं बहाना उनके पास ईसी की मंजूरी है। लेकिन दूसरी ओर खनिज राजस्व को चूना लगाते हुए अब तक SEIAA के सचिव की लापरवाही की वजह से अवैध रेत खनन के कारण प्रदेश सरकार को 7-8 सौ करोड़ का घाटा हो गया है, ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत, लेकिन चौंकिएगा तब जब SEIAA के अध्यक्ष के द्वारा लिखी गई शिकायतों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार ने मुख्य सचिव अनुराग जैन पर गैर जिम्मेदारी के लिए स्पष्टीकरण मांग लिया जाए।